Wednesday, November 18, 2020

बचपन वक्त से पहले ही बडा हो जाता है!तो....


बचपन वक्त से पहले ही बडा हो जाता है!तो....


     बचपन की नटखट यादे हर इंसान जब तक उसकी जिंदगी होती है,वो कई बार याद कर जी लेता है.

कभी माँ बाप और रिश्तेदारों के संग,कभी दोस्तों के संग,कभी आस पड़ोस, मोहल्लेवालो के संग,स्कूलों के दोस्त,मास्टरों के संग,खेल कूद के मैदानों संग.अच्छा हो या हालात से बदतर बचपन हर शख्स यादगार बना ही जाता है.जिसे याद कर कोई भी इंसान मायूस नही होता.इंसान की खासियत तो ये भी है के,वो अपने साथ अपनो का औलाद,भाई बहन,नाती पोती,भी बचपन आसपड़ोस के जो जो करीबी है,जानवरों हो परिंदों सभी का बचपन यादों में बार बार यादों बस जाता है.

     हाथ मे बहोत सारे गुब्बारे (बलून,फुग्गे)लिए लड़की बार बार मेरे शॉप के सामने के रास्ते से इधर से उधर गुजर रही थी. हर बार शॉप में खड़े कस्टमर को देख खड़े रहती शायद कोई गुब्बारा उसीसे खरीदे.हर बार वो आती,यो मैं अपने काम मे व्यस्त रहता.मगर उसके हाथ मे पीले रंग के मुस्कुराते गुब्बारे उस लड़की के आने जानेवाली हरकत का अहसास कराते.अब मैं थोड़ीसी फुरसत में था.फिर वो लड़की मुस्कुराते गुब्बारों को हाथ मे शॉप के सामने आकर रुक गयी.उसकी के साथ एक कस्टमर भी आ गया. गुब्बारेवाली लड़की ने गुब्बारा खरीदने के लिए हाथों से ईशारे से चेहरे पर मासूमियत दिखाई दे रही थी.शायद उसी मासूमियत को देखकर शॉप की पायरी चढते कस्टमर ने गुब्बारेवाली लडकी से गुब्बारे की कीमत पूछी,तो लड़की ने दो उंगलियाँ दिखाई. शॉप की पायरी चढ़ते वक्त गुब्बारेवाली लड़की उसके पीछे थी,इसलिए उसे कुछ समझ मे नही आया. 

     गुब्बारेवाली लडकी ने शॉप में खड़े कस्टमर को हाथ हिलाकर गुब्बारे लेने के लिए इशारे में कहा, फिर कस्टमर ने कीमत पूछी अब के बार लड़की ने फिर दो उंगलिया दिखाई. अब उसकी हरकत मेरी समझमे आया की गुब्बारेवाली लड़की जबान से बोल नही सकती.कस्टमर के भी बात समझमे आयी,गुब्बारे बेचनेवाली मासूम लड़की मुक्की है. ये अहसास होते ही दयाभाव  रहम हमारे दिल पे तारी हो गया.क्यो की हमे अपने बच्चे याद आये और उनका और हमारा बचपन.

     अच्छे कमाने की उम्र तक हमारे बच्चों को या हमे हमारे माँ बाप ने भीड़वाले रास्तो पर जाने से मना करते थे.आज भी हम अपने बच्चो को संभाल कर चलने की हिदायत देते है.दीपावली फेस्टीवल होने के कारण सड़क पर कपड़ा बाजार को खरेदी जाने आने वाले की ट्राफिक थी  ये लडक़ी तो बार बार मेरे शॉप के सामने के भिड़ावाली सड़क से अकेले ही हाथ मे गुब्बारे बेचने के लिए आ जा रही थी. मैने लड़की के हाथ मे गुब्बारे पर नजरें डाली (जो फोटो में दिखाई दे रहे है) तो लग रहा था,वो मुझसे मुस्कुराते हुए मानो समझा रहे थे.कभी बचपन वक्त से पहले बडा हो जाता है!तो....


अफजल सय्यद

12/11/2020

फोटो सैमसंग जे 2

अहमदनगर

 

खेलब चाहे जो भी हो मैदान में खेलना जरूरी है.मैदान , मोबाईल और हम.....



 खेलब चाहे जो भी हो मैदान में खेलना जरूरी है.मैदान , मोबाईल और हम.....

आप के सामने एक छोटे से वॉलीबॉल मैदान की तस्वीर है और कुछ बच्चे कहना मुनासिब नही,खिलाडी कहना ही बेहत्तर होंगा. जो मैदान की साफ सफाई करते नजर आ रहे है.ऐसे नजारे ,ऐसी हरकत बढ़ते हुए शहरीकरण के देखने ही नही मिलती.याने शहरे मैदानलेस बन गयी है या बसाई जा रही है.और जब शहरे मैदानलेस होंगी तो यकीनन बच्चो  के मस्ती की शक्लें भी बदलेंगी. बच्चा हसता खेलता नही,बल्कि चीड़ चिड़ा बन जायेगा.जिसके असरात आजकल के बच्चे में दिखते है.बच्चों में चिड़चिड़ापन बढ़ गया है.

ये क्यों हो रहा है? 

मोबाइल! क्या ये सच है?

आज के दौर में मोबाइल एक गुमानी दुनिया,भरामवाली दुनिया, चमकीली दुनिया,वर्चुअल वर्ल्ड जिसका हर कोई मर्द हो या औरत,बूढा हो या बच्चा दीवाना बन गया है.घंटे नही बल्कि दिन दिनभर मोबाइल में मुब्तिला रहता है.इस हकीकत से इन्कार किसीको हो ही नही सकता.

मोबाइल फोन अब दूरदराज जे अपनो से या कारोबार की गरज तक सीमित नही है.मोबाइल ने दुनिया छोटे से स्क्रीन में  सीमित या कैद किया.साथ आश्रफुल या श्रेष्ठ कहे जाने वाले इंसानी बिरादरी को वश कहे या ताबे बचपन से करने लगा.कई माँ की शिकायत कहे,या मिजाजखोरी कहे कहती है,बच्चा हाथ मे मोबाइल होतो खाना खाता है.हाथ से मोबाइल ले तो चिल्लाचिल्ला कर रोता है.कई बच्चे को गुमानी दुनिया का कार्टुन मोबाइल पर लगा कर दे तो खामोश. बच्चो को मोबाइल ऐडिक्ट कराने में माँ का बड़ा किरदार नजर आ रहा है.एडिक्ट बच्चा अब कार्टून देखते देखते कॉर्टून का किरदार बन चुके है.तरबियत का सबक,संस्कार के पाठ पढ़ानेवाले के घर भी गुमानी मायाजाल से बचे नही.

जिसकी खास वजह है,बढते शहरीकरण के वजह से घटते मैदान और मोबाइल के गुमानी गेम जैसे कई सॉफ्टवेयर का मायावी कमाल.

अब हम को हम में जब टटोलने से पता चलता है.हमने अल्लाउद्दीन की चिरागसा एंड्रॉयड मोबाइल को समझ लिया और उसे खरीदने की चाह ने खुदको कर्जदार बना दिया.

हमने मोबाइल से सोशल मीडिया जे जरिये पाँच हजार फ्रेंड्स तो बनाए अक्सर को हम जानते तक नही.वक्त अपनो को नही दे पा रहे.जिसे जानते ही नही उन्हींसे चाट कर रहे है.

पिछले कई दिनोसे एक ही बात की चर्चा है.नवजवान बच्चे मोबाइल में फंसे हुए है.बस चर्चा ही चर्चा है.

हमारे मोहल्ले के हाल यही था.कुछ बच्चे  मिलकर मेरे पास आये.मोहल्ले जब शाम हम बच्चे एक जगह जमते है तो बहोत सारे मोहल्लेवाले ऐतराज करते है. मैंने हमारे मोहल्ले के पासके ओपन स्पेस में खेलने को कहा.बच्चे वहाँ जमाना और खेलना सुरु किया.बच्चे वॉलीबॉल खेलने लगे.कुछ वहाँ भी ऐतराज जताने लगे.बच्चे डंटे रहे.मोहल्लेवाले भी धीरे धीरे उनके साथ देने लगे.मैदान में वॉलीबॉल खेलने बाहर के मोहल्लेवाले भी जमने लगे.खेल में रंगत आने लगी.बहोत सारे बच्चे मोबाइल की वहमी दुनिया से दूर हो गए.अब वॉलीबॉल की चर्चा पूरे इलाके में होने लगी और धीरे धीरे एक से दूसरी जगह वॉलीबॉल के मैदान बनाकर खेलते हुए नवजवान दिखने लगे है.अब हमारे इलाकेमें 200 से ज्यादा बच्चे हर रोज खेलते  है.

आप जो फोटो देख रहे है, ये वो मैदान है.जिसके लिए नवजवान बच्चे काम करते हुए दिखाई दे रहे है.

फिक्र सब कर रहे है और कह रहे है,हमारे बच्चे मोबाइल में फंसे हुए है.इसलिए आनेवाले दिनोंमें हम सब को ये कोशिश करनी चाहिए.छोटे छोटे ही सही मैदान को अपने बच्चों को खेलने के लिए मैदान का इस्तेमाल करना चाहिए.खेल चाहे जो भी हो मैदान में खेलना जरूरी है.गर बात समझे ......


अफजल सय्यद, 

अहमदनगर.

Tuesday, August 4, 2020

शमशान मे चिता ,कब्रस्तान में दफ्न रोज बच्चे जवान बूढ़े कोरोना के डर से हो रहे है.


                                         न्यूज वैल्यू
शमशान मे चिता ,कब्रस्तान में दफ्न रोज बच्चे जवान बूढ़े कोरोना के डर से हो रहे है......

अब हम सब भारतीयों की जिम्मेदारी है,कदम से कदम मिलाकर एक साथ खड़े रहने की,क्यों कि सरकार की कोशिश अब कम पड़ रही है.ये भी हकीकत है .....
हालात तो अब देश मे ये है कि,अपने ही मोहल्ले, अपने  पड़ोसी,अपने दोस्त अहबाब,अपने रिश्तेदार,को अचानक मरते हुए देखना पड़ रहा है.जिसमे हर मारनेवाला कोरोना का है? पिछले छह महीनोसे सुबह शाम कोरोना सुन सुन कर,कोई कैसा भी मरा हो, कोरोना ही से मरा है यह गलतफहमी की चर्चा से कई नागरिकोमे कोरोना की दहशत का असर इस तरह छा गया है कि,इन दिनों बारिश के मौसम में बारिश और बादल की वजह से बदलते पानी से बहोत सारी एक दुसरेसे फैलने वाली (वाइरल ) बीमारियाँ भी अपना असरदार जोर हर साल की तरह दिखा रही है.
जिसमे पानीसे भिजने से सर्दी,खाँसी, बुखार होता है वैसे ही बारिश का पानी नदी नाले से बहते कुए,तालाब,डैमों में जमता है.जिसमे कई जीवजंतु होने से जल निर्जन्तुकरण विभाग भी सोंच में पड़ता है ,ज्यादा मात्रा में दवा का मिश्रण भी नागरिको के आरोग्य को नुकसान पहोचाती है,कम दवा का मिश्रण भी डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया, फ्लू ये सब जानलेवा बीमारियाँ को निमंत्रण देता है.ये बीमारियां हर साल इनता असर छोडती है, बहोत बड़े पैमाने पर हमारी सरकारी आरोग्य यंत्रणा काम पर जुटी होती है.और बीमारियों को नियंत्रण में लाने में प्राइवेट अस्पतालों काम करते है. फिर भी बीमारिया हर साल आती ही रहती है,इस साल कोरोना के लंबे काल के असर से दुर्लक्षित सी हो रही है और मिलती जुलती असरात (सिम्टम्स) के कारण डॉक्टर का डायग्नोसीस उल्टा होने से बीमारको मौत और रिश्तेदारों को पैसे का भारी भुगतान करना पड़ता है.
बड़े अस्पताल मे  बहन के  के नजदीकी एक रिश्तेदार की अम्माको रूटीन बीपी चेकिंग के लिए अस्पताल लेजाया गया.बीपी जरा बढ़ा हुआ था,तो कोरोना चेकिंग को ले जाने लगे,सामने पीपी किट पहने हुए देख बीपी और बढने लगा बेटे ने जब माँ को अस्पताल ले आया तो माँ नार्मल थी.अस्पताल के उतार चढ़ाव में थोड़ा बीपी बढ़ाना लाजमी था.मगर कोरोना चेकिंग की बात सुनी तो हालात बीपी बढने से सास लेने में तकलीफ होने लगी थी.बेटे ने माँ की हालत को समझा और कोरोना टेस्ट बिना ही घर अपने जिम्मेदारी पर ले आया.अम्मा अस्पताल से घर वापसी पर नार्मल हो गयी.इस घटना से आजतक नार्मल ही है.मगर ऐसी बहोत सारे लोग ऐ सी घटनाओं के शिकार हो कर मर जाते है और इल्जाम कोरोना पर क्योकि कोरोना का कोई रिपोर्ट आपको दिखायी जाती ही नही.कोरोना हर डॉक्टर के दिलोदिमाग़ पर छाने के वजह से अव्वल टेस्ट सिर्फ कोरोना दांत का दर्द होतो कोरोना,कान का दर्द होतो कोरोना,पेट दुखे तो कोरोना टेस्ट. हम सब जानते है अब तक कोरोना का कोई इलाज नही हैं सिर्फ क्वारणटाइन ही एक मात्र इलाज इसी मानसिकता की वजह से टेस्ट रिपोर्ट पर कोरोना का निदान और अपूर्ण टेस्टिंग के सुविधा से देरी के वजह से इलाज में देरी और देरी कारण तबियत ज्यादा खराब होती है और प्रभावी इंजेक्शन की वज़ह से कुछ जाने गवाने पडी. हकीकत ये भी है के कोरोना के दिन रात की रट सब बाते छुप  गयी.
 मेरे मोहल्ले में जब दो दिन में पांच जाने गवाई है,जिसमे तहकिक से बात ये सामने आयी है कि,हार्ट ,शुगर,बीपी का मरीज  अपना सर्दी बुखार की वजह से कोरोना के फैले गलत फहमियों के कारण दवाखानों में नही जा रहे है.दवाखानों में जाने जे बाद खून पेशाब बीपी चेक कराने से पहले कोरोना टेस्ट चेक कराने के बाद रिपोर्ट के आने तक बीमारी हद पार कर रही है नतीजन मौत असर कर रही है.सर्दी की तरफ को नजरअंदाज करने से न्यूमोनिया और न्यूमोनिया से मौत का शिकार हुए है.ये सब बातें सामाजिक दर्द रखनेवाले डॉक्टरोंसे से चर्चा मालूम हुई है. 
सरकारी प्रतिबंद ने भी बहोत सारी जाने ली है.अपने ही बाप के मय्यत में शामिल न होने का गम से भी लोग मरे है.इनकम बंद होने के गम (टेंशन) भी बहोत मारे है.कोरोना के नाम पर सब दब गया है.इससे भी दुखद बात ये है के, मीडिया ने इतना भय फ़ैलाया के अपने ही अपनो के अंतिम संस्कार से भागे है ये भी हुआ है  कोरोना के नाम से फैलाये गए भय के कारण.क्योंकि इंसान सब से ज्यादा गर डरता है,वह मृत्यु से याने मरने से. दर ने रिश्तों से दूर कर दिया.उसी डर ने इंसानियत को इंसानों से दूर कर दिया.
सब से एक अपील है कि, कोई भी बीमारी की नजरअंदाज ना करे.अपना इलाज कराये,खासकर बीपी,शुगर,हार्ट की बीमारी,एसीडिटी का प्रभाव राखनेवाले अक्सर ध्यान देते ही नही.अपना रूटीन चेकअप कराते रहे.और डॉक्टरो से भी अपील है सामाजिक जागृति के लिए आपका आगे आये.साथ ही कोरोना की रिपोर्ट से पहले डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया जैसी जानलेवा बीमारी की भी जांच करवाएं ताके सही डायग्नोसीस होकर मरीज अच्छा होकर उसकी जान बचे.हर इल्जाम में कोरोना बे वजह बदनाम ना हो,कोरोना का इलाज नही है और बहोत सारे कोरोना के मरीज अच्छे होकर घर आये है.ये हकीकत है.तो अब जानेवाली जाने अचानक बढ़ रही है. वजह कोरोना हम सब के दिल मे डर पैदा कर गयी है.प्लीज् प्लीज प्लीज् अपने दिल से कोरोना का डर निकाले. छोटेसे छोटे दुखने को नजरअंदाज ना करे....
सामाजिक जागरूता के लिए हम सब हमिलकर काम करे.
सरकार सभी हालत को कड़क नियमों को शिथिल करे 

अफजल सय्यद
संपादक, न्यूज एडिटर, अहमदनगर

Monday, July 20, 2020

ऊर्दू,अरेबिक, पर्शियन, फ़्रेंच लैंग्वेजेज सीखने में रोजगार के बड़े मौके - प्रो. शाहिद खोत सर


ऊर्दू,अरेबिक, पर्शियन, फ़्रेंच लैंग्वेजेज सीखने में रोजगार के बड़े मौके - प्रो. शाहिद खोत सर


 प्राइम चर्चा में 10 th, और 12 th के बाद लैंग्वेजेज( भाषा)में  बेहतरीन करियर बनाया जा सकता है.इस विषय को लेकर प्रोफेसर शाहिद खोत सर ने मार्गदर्शन (रहनुमाई) किया.शाहिद खोत सर ने कहा के, अक्सर बच्चे समझ नही पाते के 10th और 12th बाद क्या किया जाये.और पैरेंट भी नही जानते के बच्चे के किए क्या मुनासिब है और क्या नही? जो कुछ थोड़ा बहोत जानते है, उनकी अक्सर ख्वाहिश होती है अपना बच्चा डॉक्टर या इंजीनियर बने.मगर ये सब बच्चो की सलाहियत पर निर्भर होता है.बहोत सारे बच्चे अपने दोस्तों की वजह से अपना कॉलेज चुनते और अपनी साइड भी तय करते है.यह सब इस वजह से होता है कि,कोई सही गाइडेंस करनेवाले नही होते है.लेकिन आज के टेक्नोलॉजी के दौर में झुम प्राइम चर्चा और बहोत सारी संघठन अलग अलग ऑनलाइन प्रोग्रामस ले रही है.जिसका फायदा अब सबने उठाने की जरूरत है.जिसका एक हिस्सा के आज मै उर्दू, अरबिक,पर्शियन, फ्रेंच दीगर लैंग्वेजेज की करियर बनाने में कितने कारगर है.ये बताने आया हुँ. 
शाहिद सर अपनी निजी जिंदगी की बात बताते हुए कहते है.मुझे कोई बतानेवाला नही था.मैंने पहले बी.कॉम किया.बाद एम कॉम,फिर उर्दू में एम.ए. किया और आखिर में मैंने अरेबिक किया और प्रोफेसर बन गया.लंबा सफर कोई बतलानेवाला  नही था.बचपन मे वालिद गुजर चुके थे.माँ और बड़ेभाई पढ़ाई पढ़ाई के बारे में कुछ नही जानते.सिर्फ पढ़ने की हिदायत करते थे.उनकी दुआ का असर है,जो देर बाद मंजिल मिल ही गयी दोस्त बिरादर भी कुछ भी नही जानते थे.इस बात को महसूस करते हुए आज आपको तजुर्बात और आज के वक्त में अरबिक में बहोत सारे रोजगार के मौके है.हमारे बच्चे इसको समझे और फायदा उठाये.
मदारिस के बच्चो को भी बहोत फायदा है .इसकी तफ़सीर में कहा,मदारिस के बच्चे बहोत सारा अरबी जानते है.मदरसों से पढाई के बाद इमामत की सोंचते है.वहाँ भी जगह खाली नही होती है.फिर गुरबत और बेरोजगारी का मुकाबला करना होता है.मदारिस के बच्चे मदारिस के पढ़ाई बाद आगे असरी तालीम से अरबिक वा पर्शियन डिग्री हासिल कर करते है तो बहोत सारे काम जिससे बड़ी आमदनी हासिल कर सकते है.जिस पर हमें खास तवज्जो देने की जरूरत है.अरबी बहोत बड़े पैमाने पर बोली जानी वाली जबान है.जिसका बहोत बाद मार्केट है. वैसे अरबी दिनी एतेबार से भी समझना बहोत जरूरी है.
प्रोफेसर शाहिद खोत सर ने हर वो बात बतलाई जिससे फायदा हासिल हो सके.साथ ही आनेवाले दिनों ऑनलाइन अरबी क्लास बात पर बात की के गर बहोत सारे लोग शामिल हो तो वो भी जरूर सुरु की जाएंगी.जो अरबिक डिग्री लेना चाहते है.तो हर तरह की मदत रहबरी करने की बात कही है.बहोत अहमबाते से लोगो को बात समझाने की कोशिश की है.
अहमदनगर झुम प्राइम चर्चा  के जानिब प्रोफेसर शाहिद खोत सर का शुक्रिया अदा किया गया.महाराष्ट्र के मुख़तलिफ़ इलाको से लोगो ने ऑनलाइन हिस्सा लिया.बहोत सारे स्टूडेंट्स को इस का फायदा जरूर होंगा. इंशाअल्लाह....
अफज़ल सय्यद
एडीटर,न्यूज वैल्यू, अहमदनगर.

Tuesday, May 12, 2020

रमजानुल मुबारक -१९ *कसे वागावे कसे जगावे*


रमजानुल मुबारक -१९
 *कसे वागावे कसे जगावे*
पवित्र रमजान महिन्याचे शेवटचे दहा अकरा दिवस आता बाकी आहेत. उद्या रमजान महिन्याचा दुसरा कालखंड पूर्ण होणार आहे. मगफिरत च्या या काळात प्रत्येकानेअल्लाहतआलाची माफी मागून आपल्या कृत्यांबद्दल आपल्या संवेदना व्यक्त केल्या आहेत.करीत आहेत.ज्यावेळी अल्लाहने या पृथ्वीतलावर मानव जन्माला घातला. त्यावेळी पैगंबर हजरत आदम आणि हजरत हव्वा ही जोडी निर्माण केली.पुढे त्यांच्यापासून अपत्य निर्मिती होऊन आजच्या जगातील सर्व माणसे अस्तित्वात आली. (या अनुषंगाने आजची सर्व माणसं ही एकमेकांची नातेवाईक आहेत).वेळोवेळी या माणसांनी जेव्हा जेव्हा सत्याचा मार्ग सोडून इतर मार्ग धरला, तेव्हा त्यांना परत योग्य मार्गावर आणण्यासाठी त्या त्या काळामध्ये अनेक पैगंबर निर्माण केले गेले.त्यांनी आपल्या समकालीन लोकांना अल्लाहला अभिप्रेत असलेला मार्ग सांगितला. ज्यावेळी लोकांनी फारच मनमानी केली त्यावेळी त्यांना त्यांच्या कर्माची शिक्षा पण मिळाली. अशाप्रकारे जवळपास सुमारे एक लक्ष चोवीस हजार पैगंबर या पृथ्वीतलावर होऊन गेले. शेवटी अल्लाहतआला ने कुरआन मार्फत हे जाहीर करून टाकले कि हजरत मोहम्मद हे आता शेवटचे प्रेषित असून यानंतर कोणीही पैगंबर येणार नाही.मानवाने जर आपल्या चुका सुधारल्या नाही तर या सृष्टीचा शेवट होईल. अनेक धर्मांच्या शिकवणुकीतून ही बाब सर्वमान्य आहे कि या सृष्टीचा शेवट आता जवळ आलेला आहे. कारण माणसे आता सर्व प्रकारची नीतिमत्ता सोडून वागू लागली आहेत. स्वैराचार वाढला आहे. कोणत्या धर्माने वाईट कृत्यांचे समर्थन केलेले नाही. तरी सुद्धा आज सर्वत्र दुष्कृत्ये वाढीस लागली आहेत. जो तो आपल्या मर्जीने वागत आहे. मुस्लिम असेल तर कुरआनमध्ये सांगितलेल्या गोष्टी विरुद्ध ते वागत आहेत. इतर धर्मीय असतील ते सुद्धा धर्माच्या विरुद्ध वर्तन करीत आहेत. त्यामुळे अल्लाह आणि ईश्वर यांनी सांगितल्याप्रमाणे कयामत जवळ आलेली आहे. प्रत्येक जण हा विचार करतोय कि मी कसा जरी वागलो तर काय होणार आहे. परंतु या विकृत विचारसरणीतूनच गैरप्रकार वाढले आहेत. जीवनाच्या प्रत्येक क्षेत्रामध्ये चांगले कमी आणि वाईट करणारे जास्त झाले आहेत. त्याचा परिणाम सर्वांना भोगावा लागत आहे. एकीकडे धार्मिक कार्याचा महापूर येतो. प्रवचने होतात, तब्लिगी मेळावे होतात, हरिनाम सप्ताह होतात, दानधर्म होतात, नेकीचे कार्य केले जातात आणि दुसरीकडे अल्लाह किंवा ईश्वराने जे करायला सांगितले नाही ते करणारे सुद्धा मोठ्या प्रमाणात त्यांचं कार्य करतात. धर्माने दारू निषिद्ध केली तरी दारू पिणारे आणि विकणारे वाढले.अश्लीलता वाढली. व्यभिचार, दुराचार वाढले. नीतिमत्ता बदलली. व्याजाचे धंदे वाढले. फसवणूक करणारे वाढले. कर्जबुडवे सुद्धा वाढले. खोटेपणाने सत्ता उपभोगणारे वाढले. हे चित्र जगात सर्वत्र पाहायला मिळत आहे.हे सर्व अति झाल्यामुळे या जगाचा ऱ्हास जवळ आला आहे याबद्दल कोणालाही शंका नाही. म्हणून येणाऱ्या युगामध्ये जे सत्मार्गाने जीवन जगतील,ते अल्लाहची मर्जी संपादन करतील आणि कयामतच्या दिवशी ते स्वर्गाचे हक्कदार होतील. इतरांचे काय होईल हे सांगण्याची आवश्यकता नाही. देवाने ही जीवन दिले. त्यात आपण कसे वागायचे हे ज्याने  त्याने ठरवले पाहिजे.अल्लाहतआला सर्वांना चांगले वागण्याची सुबुद्धी देवो. आमीन .
*सलीमखान पठाण*
*9226408082*

Sunday, May 10, 2020

रमजानुल मुबारक -१७ *आपल्या संरक्षणार्थ जकात* पवित्र रमजान महिन्यांमध्ये प्रत्येक



रमजानुल मुबारक -१७
*आपल्या संरक्षणार्थ जकात*
पवित्र रमजान महिन्यांमध्ये प्रत्येक जण आपल्या वार्षिक व्यवहाराचा हिशोब करून जर आपण जकात देण्यास पात्र असू तर ती आदा करीत असतो. जकात देण्याचे सुद्धा काही निकष आहेत. ज्याला आवश्यकता आहे त्यालाच ती दिली पाहिजे.ज्यांची आर्थिक परिस्थिती चांगली आहे त्यांना जकात देता येत नाही.जकातीचा मुख्य उद्देश हा व्यक्तीच्या दैनिक आवश्यक गरजा पूर्ण करणे,दारिद्र्य निर्मूलन करणे हा आहे. त्यासाठी समाजातील गोरगरिबांना शोधून त्यांची मदत केली पाहिजे. जकात देताना घेणारी व्यक्ती कोणत्याही प्रकारे अपमानित होणार नाही, तिची समाजामध्ये फार चर्चा होणार नाही,घेणाऱ्याला कमीपणा वाटणार नाही अशा पद्धतीने द्यावयाची असते. एका हाताने देतांना दुसऱ्या हाताला सुद्धा खबर होणार नाही ही पद्धत त्यासाठी अंगीकारली पाहिजे.

अनेक प्रसंगांमुळे माणसे अडचणीत येतात. व्यवहारात झालेले मोठे नुकसान, मोठी चोरी, अचानक आलेल्या नैसर्गिक आपत्तीमुळे झालेले नुकसान अशा विविध कारणांमुळे चांगली चांगली माणसं कंगाल होऊन जातात. अशा लोकांना मदतीची खूप गरज असते. काही घटक असे असतात कि त्यांचं कोणी नसतं. त्यांना मदतीची आवश्यकता असते.काही कुटुंब अशी आहेत कि त्यांचं पालनपोषण करणारा कोणी नाही. अशांना मदतीची आवश्यकता असते. अनाथ, विधवा, आजारी, निराधार लोकांना सुद्धा मदत करण्याची आवश्यकता असते. समाजातील अशा सर्व प्रकारच्या गरजू घटकांना जकातीच्या रकमेतून मदत केली जाते.हे एक प्रकारचे गुप्तदान आहे. याचा फार गवगवा किंवा देखावा करू नये. अल्लाहलआलाची मर्जी संपादन करण्यासाठी त्याच्या आदेशानुसार आपण हे सत्कार्य करीत आहोत. याचा मोबदला आपल्याला तोच देणार आहे ही श्रद्धा ठेवून जकात दिली जाते. इथे वशिलेबाजी अजिबात चालत नाही.जकात आदा करण्यासाठी केला जाणारा हिशोब स्वतःच्या सदसद्विवेकबुद्धीला स्मरुन करावयाचा असतो.

त्यासाठी आपले सर्व व्यवहार लिहून ठेवा असे हजरत पैगंबरांनी सुद्धा सांगितले आहे. तोंडी व्यवहारांमध्ये गफलत होण्याची शक्यता असते. म्हणून कोणताही व्यवहार, कुणाशी जरी केला जात असला तरी त्याची नोंद करून ठेवली पाहिजे. कारण विस्मरणामुळे आपण विसरून जातो आणि मग त्यातून नवे प्रश्न निर्माण होतात. त्यासाठी आर्थिक असो किंवा इतर प्रकारचे व्यवहार लिहून ठेवणे आवश्यक आहे.
जकात वर्षभरात कधीही आदा केली तरी चालते. मात्र रमजान महिन्यांमध्ये प्रत्येक कामाला सत्तर पट पुण्य मिळत असल्यामुळे ती रमजानमध्ये आदा करण्याची रीत जगभर आहे. यावर्षी कोरोनामुळे गेले दोन महिने आपल्याकडे सर्व व्यवहार ठप्प आहेत. त्यामुळे अनेक माणसं आणि त्यांची घरे वरून चांगली दिसत असली तरी आतली परिस्थिती फक्त त्यांनाच माहिती आहे. अशा सर्व घटकांना समाजातून मोठी मदत दिली जात आहे. यावर्षी रमजान महिन्याची वाट न पाहता सर्व घटकांनी मदतीचा हात गरजूंना दिला. त्याचा मोबदला अल्लाहतआला प्रत्येकाला चांगला देईल याबद्दल कोणीही शंका बाळगू नये . (क्रमशः)
*सलीमखान पठाण*
*9226408082*

Saturday, May 9, 2020

रमजानुल मुबारक - १५ *कयामत आनेवाली है...*



रमजानुल मुबारक - १५
*कयामत आनेवाली है...*

पवित्र रमजान महिन्याचा अर्धा कालावधी आज पूर्ण होत आहे . पंधरा दिवसांपूर्वी जेव्हा महिना सुरू झाला तेव्हा कोरोनाचे सावट, बंद असलेल्या मशिदी, उन्हाची वाढलेले तीव्रता या सर्व पार्श्वभूमीवर महिना कसा जाईल ही चिंता प्रत्येकाला वाटत होती .आता अर्धा काळ निघून गेल्यानंतर दररोजची सवय झाली आहे . आता वर्षभर जरी रमजान महिना राहिला तरी काही होणार नाही एवढे रमजानचे वातावरण अंगवळणी पडले आहे . तहान भूक विसरून फक्त अल्लाहची इबादत हे एकमेव ध्येय समोर ठेवून घराघरातून रमजान महिन्याचे पालन केले जात आहे . लहान मुलापासून वृद्धावस्थेतील माणसांपर्यंत सर्वजण मनोभावे अल्लाहची प्रार्थना करीत आहेत . कुरआन शरीफचे वाचन करीत आहेत . नमाज पठण करीत आहेत . दानधर्म करीत आहेत .सहेरी आणि इफ्तारच्या उपक्रमांनी प्रत्येकाची दिनचर्या बदलून गेली आहे .जगाबरोबर देशात आणि राज्यात वाढत जाणारा कोरोनाचा प्रादुर्भाव काळजाचे ठोके चुकवत आहे . अनेक चांगली माणसे , आप्त,स्वकीय कोरोनाचा बळी ठरले आहेत .एका छोट्याशा  विषाणूने संपूर्ण जगास वेठीस धरले आहे . की सर्व त्या विधात्याची किमया आहे . मोठमोठ्या सत्ता, सामर्थ्य आज हतबल ठरले आहेत. सृष्टीचा निर्माता, ईश्वर, अल्लाह, परमेश्वर हाच या संकटातून वाचवू शकतो, ही धारणा दृढ झाली आहे. डॉक्टरांच्या रूपामध्ये तो आपल्या भक्तांना वाचवीत आहे . हजारो लोक कोरोनाच्या विळख्यात सापडले असले तरी तेवढेच या रोगातून बरे सुद्धा होत आहेत .

कोरोना का आला ? कुरआन शरीफ मध्ये म्हटले आहे, ज्या ज्या वेळी जगात स्वैराचार वाढत असतो. त्यावेळी आम्ही आपली झलक दाखवून आपल्या सामर्थ्याचं दर्शन घडवीत असतो. आज आपण पाहतोय गेल्या काही वर्षांमध्ये माणसाच्या मनमानीने जगभरात थैमान घातले आहे. कोणत्याही प्रकारची लाज,लज्जा, मर्यादा, आदर न बाळगता प्रत्येकाच्या मनाला वाटेल तसा तो वागत आहे. साधन,शुचिता, सामाजिक संकेत बाजूला ठेवून माणसे स्वैराचारी बनली आहेत. स्वार्थीपणामुळे ज्याला जे योग्य वाटतं तसं तो वागतोय. निसर्गाचा असमतोल निर्माण झाला आहे. सृष्टीचे प्रदूषण वाढले आहे. या सर्वांना ठीक करण्यासाठी कोरोना आला आहे.पण तो लवकरच जाणार आहे.आज रमजान ईद सर्वत्र साधेपणाने साजरे करण्यासाठी प्रत्येकाची मनोभूमिका तयार झाली आहे. ही पहिली ईद आहे कि या ईदला नवीन कपडे घेण्याची कुणाचीच मानसिकता राहिलेली नाही .पंचवीस मे पर्यंत दुकाने उघडू नये अशी मागणी आता मुस्लिम समाजातून होत आहे . हे परिवर्तन फार मोलाचे आहे . किमान सहा महिने तरी या परिस्थितीतून बाहेर यायला लागणार आहेत .त्यामुळे ईद जरी साधेपणाने झाली तरी येणारी दिपावली सर्व देशवासीयांची जोरात होईल अशी अपेक्षा करू या .आज निर्माण झालेली परिस्थिती म्हणजे अल्लाह तआला ने कुरआन शरीफ मध्ये नमूद केल्याप्रमाणे कयामत जवळ आली आहे . याची लक्षणे आहेत . तेव्हा माणसा, आता तरी तू सुधर बाबा .एवढेच आपण म्हणू शकतो. एका शायरने म्हटले आहे
मानते है वबा के दिन है, मगर ये भी खुदा के दिन है,दिलो से मायूसिया निकालो ,जरा सा आगे शिफा के दिन है .
 इन्शा अल्लाह ... (क्रमशः)
*सलीमखान पठाण*
*9226408082*